मुस्लिम लीग के जिन्ना ने ब्रिटिश हुकूमत वाले इंडिया के इस्लामिस्टों को पाकिस्तान नाम की जन्नत का हसीन ख्वाब बेच कर उनके वोटों के दम पर पाकिस्तान बनवा कर खुद तो चला गया लेकिन हिंदुस्तान नाम के जहन्नुम (बतौर जिन्ना) के उन्हीं वोटरों को पाकिस्तान नहीं आने दे कर हममजहबियों के साथ बेईमानी और दग़ाबाज़ी की इन्तिहा की और आने पर उन्हें मोहाजिर याने रिफ्यूज़ी कह कर इतनी बदसलूकी की कि उनके लीडर को जान बचाने लंदन भागना पड़ा - तो पाकिस्तान बनाने वाले वे 2 से 2.1/2 करोड़ मुस्लिम लीगी वोटर 15 अगस्त 1947 को मुस्लिम लीग के भंग कर दिये जाने पर उसी दिन एक शातिर मक्कार अंग्रेज के बनाये सियासी गिरोह में घुस कर उस पर काबिज़ हो गये ।
इतिहास गवाह है - 1947 से अब तक की उनकी हर हरकत इस बात का सबूत है कि वे पाकिस्तान परस्त हैं ।
बुधवार, 6 मार्च 2019
#कोंग्रेस और उसके सहयोगी दल #पाकिस्तान_परस्त क्यों हैं ?
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